एक तरफ बाबुल की गलियाँ
एक तरफ संसार पिया का
किसको थामूं किसको छोडूं
दोनों हैं आधार जिया का
आगे कुँवा तो पीछे खाई
जगने कैसी रीत बनाई
किस्मत ने क्या खेल है खेला
मनवा डोले जैसे हिंडोला
अपनों को क्यों गैर बनालूं
गैरों को कैसे अपनालूं
चीर के अपनी माँ का आँचल
कैसे अपनी शाल बनालूं
क्यों अरमान मिटा लूँ अपने
क्यों सपनों को आग लगालूं
इन पैरों में बांध के बेड़ी
मन में झूठे स्वप्न सजालूं
एक तरफ है बचपन सारा
दूजी ओर किस्मत का तारा
भूत ,भविष्य खड़े हैं दोनों
क्या होगा अंजाम हमारा
- नीतू ठाकुर
