गुरुवार, 25 अक्तूबर 2018

औकात रखता हूँ .....नीतू ठाकुर

मेरे लिबास से मेरी औकात का अंदाजा न लगा 
इस फटी कमीज़ में करोड़ों के बिल रखता हूँ 
उधार की ज़िंदगी और मिट्टी के तन में 
मोहब्बत भरा कोहिनूर सा दिल रखता हूँ 

लोग लगे हैं मेरी हस्ती मिटाने में 
मै तो बस निगाहों में मंजिल रखता हूँ 
सुना है टूटा हुआ दिल जुड़ता नही है 
इसी लिए दिल को थोड़ा संगदिल रखता हूँ 

बेफिजूल बोलना तो हमें आता ही नही 
मै तो हमेशा मुद्दे की बात रखता हूँ 
एक बार मेरी तरफ हाथ बढ़ा कर तो देख 
मै कितनी मोहब्बत से तेरी हथेली पर हाथ रखता हूँ 

भीड़ जुटाने का शौक नही है हमें 
बस दो -चार दोस्त साथ रखता हूँ 
बेमतलब की यारी का फायदा क्या है 
दोस्त कम रखता हूँ पर खास रखता हूँ 

अधूरे ख्वाब और टूटे हुए हैं अरमान तो क्या 
दिल के कोने में ये भी एक सौगात रखता हूँ 
 पूछ सकता हूँ खुदा से दिल टूटने का सबब 
खुदा के दर पर इतनी औकात रखता हूँ 

          नीतू ठाकुर 




  

शुक्रवार, 12 अक्तूबर 2018

तुझे एक नजर देखा है .... नीतू ठाकुर


रेशमी जुल्फ में बिखरे सुनहरे ओस के मोती
हमें बेचैन ना करते अगर चाहत नही होती

तेरी खामोश नजरों ने बहुत कुछ कह दिया हमसे
तुम्हारी मुस्कुराहट ने निकाला है हमें गम से

तेरा ख़्वाबों में ख्यालों में बसर देखा है
जब से नजरों नें तुझे एक नजर देखा है

कोई तो बात है तुझमें कोई दानाई है
तेरी चाहत का जो यूँ खुद पर असर देखा है

न जाने क्यों तेरी हर बात पर हमको यकीं आये
मेरी वीरान दुनिया में वो बनकर रौशनी आये

बहुत गम सह चुके हैं हम बहुत आँसू बहाये हैं
मगर फिर भी ये दिल कहता न तुम बिन अब ख़ुशी आये

तुम्हीं से हर ख़ुशी मेरी तुम्हीं से हैं हमारे गम
मेरी हर एक दुआ तुम पर निछावर है मेरे हमदम

मेरी उलझन को सुलझाए मुझे वो बंदगी आये
जहाँ तुम साथ ना हो अब न ऐसी ज़िंदगी आये

                          - नीतू ठाकुर

सौगंध पुरानी ...नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 नवगीत सौगंध पुरानी मापनी 12/12 इक नौका इतराती झूमी दीवानी सी हर रेत हुई खारी अर्णव के पानी सी तट मौन खड़े दर्शक वृक्षों की संगत में केसरिया ...