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शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

ज़िंदगी-मौत......नीतू ठाकुर


मौत से पूछा जो हमने
देर कर दी आते आते
मौत अचरज से निहारे
देख मुझको मुस्कुराते
ज़िंदगी ने इस कदर
लूटी हमारी ज़िंदगी
अब तो दिल करता है हर पल
मौत की ही बंदगी
ज़िंदगी तो ख्वाब है
एक दिन मिट जाएगी
मौत है असली हकीकत
एक दिन टकराएगी
मौत से बढ़कर कोई भी
चाहने वाला नहीं
मिल गई एक बार तो फिर
छोड़कर न जाएगी
ज़िंदगी से खूबसूरत
मौत की हर एक अदा
देख ले एक बार जो 
हो पाए न फिर वो जुदा
मुद्दतों के बाद उतरा
आँख से पर्दा मेरे
ज़िंदगी के ख्वाब टूटे
ख्वाब है अब बस तेरे
मुस्कुराई मौत बोली
चाँद सा चेहरा खिला
 खुश नसीबी है मेरी 
जो चाहने वाला मिला 
मेरी खातिर इतनी चाहत 
ज़िंदगी से यूँ  गिला 
ख़त्म कर अब ज़िंदगी का 
जानलेवा सिलसिला 
ज़िंदगी झूठी है जितनी 
उतनी ही मगरूर है 
चल नई दुनिया में जो 
हर रंज-ओ -गम से दूर है 

    - नीतू ठाकुर 




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