वक़्त की दहलीज़ पर
रोशनी सी टिमटिमाई
रात के अंधियारे वन में
एक खिड़की दी दिखाई
चल ख्वाबों के पंख लगाकर
नील गगन में उड़ते जायें
तारों से रोशन दुनिया में
सपनों का एक महल बनायें
जहाँ बहे खुशियों का सागर
फूलों की खुशबू को समाये
ठंडी ठंडी पुरवइया में
इंद्रधनुष झूला बन जाये
चमक चमक के जुगनू देखो
अंधियारे में राह दिखायें
कोयलिया की तन पे तितली
झूम उठी है पर फैलाये
चमक रहा अंबर में चन्दा
बुला रहा बाहें फैलाये
मुक्त करो अब अपने मन को
थमा वक़्त गुजर न जाये
- नीतू ठाकुर
