पंख कटे पैरों में बेड़ी
गुजरी उम्र बची बस थोड़ी
मिट्टी से जन्में पुतलों को
मिट्टी में मिल जाना है
एक बार बस एक बार
उस अंबर को छू आना है
रीत, रिवाज, समाज के डर से
खुद को मुक्त कराना है
लाचारी की छोड़ दुशाला
दुनिया से टकराना है
एक बार बस एक बार
उस अम्बर को छू आना है
तुच्छ ,हीन ,अज्ञानी बनकर
शून्य नही रह जाना है
अर्थहीन जीवन को अपने
अर्थवान कर जाना है
एक बार बस एक बार
उस अंबर छू आना है
इस दुनिया के नक़्शे पर
अपनी पहचान बनाना है
जीवन एक संकल्प बनाकर
जन्म सफल कर जाना है
एक बार बस एक बार
उस अंबर को छू आना है
- नीतू ठाकुर
चित्र साभार - गूगल
