शनिवार, 18 सितंबर 2021

सौगंध पुरानी ...नीतू ठाकुर 'विदुषी'


 नवगीत

सौगंध पुरानी

मापनी 12/12


इक नौका इतराती

झूमी दीवानी सी

हर रेत हुई खारी

अर्णव के पानी सी


तट मौन खड़े दर्शक

वृक्षों की संगत में

केसरिया वर्ण सजे

उजली सी रंगत में

तोड़ी चट्टानों ने 

सौगंध पुरानी सी


कुछ बूँदों को थामे

दुर्बल आँचल धानी

पाटल मुरझाया सा

करता है मनमानी

वर्णों की माल सजे

लिख प्रेम कहानी सी


चंदा की परछाई

नदिया के मनभायी

छूकर मुस्काती सी

बदरी नभ पर छाई

यादें भरती झोली

इक रात सुहानी सी


नीतू ठाकुर 'विदुषी'

रविवार, 12 सितंबर 2021

हिंदी है निर्धन की भाषा : नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 

गीत

हिंदी है निर्धन की भाषा

मापनी ~ 16/16


भूल गया मनु निज वाणी को

ऐसे जकड़ी धन की माया

हिंदी निर्धन की भाषा है

धनिकों ने कब है अपनाया


बिलख रही है निज आँगन में

बिन अधिकार अभागन बनके

इतराती है सौतन इंग्लिश

रूप सजा कर चलती तन के

अगणित पुत्रों की है माता

जिसका है उपहास उड़ाया


परित्यक्ता बन भटक रही है

न्यायालय के द्वारों पर जो

लज्जित सी अपने होने पर

पाषाणी व्यवहारों पर जो

संस्कृत ने जो पौधा सींचा

उस हिन्दी की शीतल छाया।।


सीखो प्राण गुलामी करना

किस संस्कृति ने सिखलाई है

स्वाभिमान का तर्पण कर के

उन्नति कब किसने पाई है

पीछे कुआं सामने खाई

हर बालक अंधा है पाया


नीतू ठाकुर 'विदुषी'

सौगंध पुरानी ...नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 नवगीत सौगंध पुरानी मापनी 12/12 इक नौका इतराती झूमी दीवानी सी हर रेत हुई खारी अर्णव के पानी सी तट मौन खड़े दर्शक वृक्षों की संगत में केसरिया ...