रोज मै तुम्हें कितना
इंतजार करवाता हूँ
थक हारकर जब
लौटकर आता हूँ
ज़िंदगी की उलझनों में
खोया खोया सा मै
तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान को
नजरअंदाज कर जाता हूँ
कभी कभी गुस्से में
बहुत कुछ कह जाता हूँ
और तुम्हारे जाने के बाद
अधूरा सा रह जाता हूँ
धधकती मन की ज्वाला से
तुमको जलाता हूँ
निर्दोष होते हुए भी
कितना कुछ सुनाता हूँ
क्यों की तुम ही तो हो जो
समझ सकती हो मेरे जज्बात और
हर पल कोसते परेशान करते मेरे ख़यालात
एक तुम्ही तो हो
जिसे अपना समझ कर
सता सकता हूँ ,रुला सकता हूँ और
प्यार के दो मीठे शब्दों से
मना भी सकता हूँ
जब पड़ जाती है रिश्ते में खटास
तब भी दिल के किसी कोने में
बच जाती है यादों की मिठास
तुमसे मिलने के लिए
दिल बेकरार रहता है
इन आँखों को पल पल
तुम्हारा इंतजार रहता है
मै कुछ भी क्यो न करलूं पर
तुम लौटकर आओगी
ये ऐतबार रहता है
तुम्हारे और मेरे दरमियाँ
कायम हमेशा प्यार रहता है
एक तुम ही तो हो जो
इस पागल को अपना सकती हो
मेरी हर खता भुलाकर
मेरी खुशियों के लिए मुस्कुरा सकती हो
तुम और सिर्फ तुम ...
- नीतू ठाकुर
