मनमीत मै तेरा गीत बनूँ
संगीत बने एहसास
है मन में बस इतनी सी आस
रहूँ मै हर पल तेरे पास
दो नैनों की डोली में
मै कितने ख्वाब सजा बैठी
तेरे प्रीत में ऐसे रंगी
सारे रंग भुला बैठी
जब तक तन में साँस है बाकी
तब तक है विश्वास
रहूँ मै हर पल तेरे पास .....
अब न कोई राँझा है और
ना है हीर दिवानी
बरसों पहले ख़त्म हुई हैं
प्रेम की अमर कहानी
अपने अनुरागी मन का
दुनिया न करे उपहास
रहूँ मै हर पल तेरे पास .....
जनम जनम के बंधन में
जब बंध बैठे दो मीत
कभी न टूटे फिर वो नाता
है ये जग की रीत
किस्मत ने जोड़ा ये रिश्ता
है हमको आभास
रहूँ मै हर पल तेरे पास ......
विरह वेदना सह न सकेंगे
एक पल भी खुश रह न सकेंगे
तुम खुशियों की चाभी हो ये
तुम से कभी हम कह न सकेंगे
हर पल नैना तुझको ढूँढे
तुम बिन रहें उदास
रहूँ मै हर पल तेरे पास .....
- नीतू ठाकुर
