बुधवार, 26 जनवरी 2022

गणतंत्र दिवस की कविता 2022




 

मंत्र सदा गणतंत्र सिखाता

नित उच्चारण करना है

बीज हृदय कर रोपित समता 

सबको धारण करना है।।


दृढ़ संकल्पित व्रत जीवन का

चलता जैसे सहगामी

स्वाभिमान का अर्थ सिखाता

भाल केसरी बहु धामी 

स्वप्नपूर्तियाँ हर्षित होकर

कहती पारण करना है।।


संविधान की हर शाखा ने

बीज न्याय का बोया है

जैसे गंगा की धारा ने

पाप हॄदय का धोया है

जात पात की बेल विषैली

मिलकर मारण करना है।।


स्वर्णिम स्मृतियों की परछाई

झाँक रही है द्वारे से

शंखनाद गूँजेगा नभ तक

दिल्ली के गलियारे से

राम राज्य कर स्थापित जग में

एक उदाहरण करना है।।


नीतू ठाकुर 'विदुषी'

गीतिका नई-नई हैं

 गीतिका मापनी ~ 1212 212 122 1212 212 122 बिछा रही प्रेम पुष्प पथ पर प्रबुद्ध रातें नई-नई हैं। करे सुवासित तथा प्रकाशित विबुद्ध बातें नई-नई ...