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शनिवार, 23 दिसंबर 2017

तुम्हें मेरी याद आयेगी न ?...नीतू ठाकुर

सच कहो तुम्हें मेरी याद आयेगी न ?
मेरे साथ हर पल जिया है तूने 
तेरे गम और ख़ुशी का साक्षीदार हूँ मै 
आज आकर इस आखरी मक़ाम पर 
बहुत बेबस और लाचार हूँ मै 
मिटना ही मुकद्दर था चंद सांसे ही बची हैं 
और तेरे चेहरे पर अनजानी हंसी है 
देखता हूँ मौन खड़ा इन खुशियों के बाजार को 
भुला रहे हैं सब लोग मुझ जैसे बेकार को 
सब को इंतजार है आने वाले कल का 
किसको है ख्याल इस मिट रहे पल का 
मिट रहा हूँ पल पल किसी को गम नहीं 
तुम कहते हो वक़्त बेरहम है क्या  तुम बेरहम नहीं ? 
कितना कुछ पाया है मेरी सोहबत में तुमने 
सब कुछ भुला दिया तुमने एक दिन में 
देखते ही देख़ते काल में समा जाऊँगा 
बस एक तारीख बन कर रह जाऊँगा 
तुम्हारा इंतजार करूँगा तुम्हे बुलाऊँगा 
बस एक बार आवाज देना दौड़ा चला आऊँगा 
तुम्हें अपने साथ बीते कल में ले जाऊँगा 
दो पल के लिए ही सही तुमसे मिलकर मुस्कुराऊंगा 
सच कहो तुम्हें मेरी याद आयेगी न ?

           -  नीतू ठाकुर "नीत"



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