शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

जाने क्यों तेरी याद.....नीतू ठाकुर

जाने क्यों तेरी याद तेरे बाद भी रही 
हर शाम तेरे नाम तेरे बाद भी रही 

नाकाम कोशिशें की भुलाने की आप को 
ये जान तेरे नाम तेरे बाद भी रही 

कब तक तलाशते हम ख्यालों में आप को 
चाहत ये बेजुबान तेरे बाद भी रही 

आँखों में अश्क़ भरकर रूखसत वो हो गए 
उम्मीद हसरतों को तेरे  बाद भी रही 

हमको पराया कर गए शब्दों के तीर से 
हर बात तेरी याद तेरे बाद भी रही  

आँखों में नमी दिल में बसती उदासियाँ 
सौगात तेरी साथ तेरे बाद भी रही 

 - नीतू ठाकुर 

गुरुवार, 9 अगस्त 2018

शहीद की माँ... नीतू ठाकुर


सरहद पे चली जब गोली
तब माँ धरती से बोली
मेरा लाल है तेरे हवाले
कहीं लग ना जाये गोली

रस्ता देख रहें हैं उसका
व्याकुल से दो नैना
पिछले बरस ही लाई थी
मै नई दुल्हन का गौना
सूनी ना होने देना
दुल्हन की मेरे कलाई
जीते जी मर जाऊँगी
अगर बेवा नजर वो आई

सरहद पे चली जब गोली  .....

नन्ही बिटिया खो ना दे
कहीं बाबुल का आधार
एक बार भी कर ना पाया
बेटा उसको प्यार
बिन बाबुल के पा न सकेगी
चाहत और दुलार
नन्ही सी उस जान पे
कर देना  इतना उपकार

सरहद पे चली जब गोली  .....

खून से लथपथ लाल मेरा 
जब सपनों में है आता 
सीना छलनी हो जाता है 
जब वो मुझे बुलाता 
होती रहती है अब घर में 
अश्कों की बरसात 
नींद नही आती अब हमको 
सारी सारी रात 

सरहद पे चली जब गोली  .... 

धरती का जवाब :-

वीर शहीदों की लाशों पर 
कितने नीर बहाऊँ 
कहाँ छुपाऊँ लालों को 
मै खुद ही समझ ना पाऊँ 
मेरी खातिर लड़ते है 
मुझपर ही चला कर गोली 
तुम सब मेरे लाल हो 
यूँ  ना खेलो खून की होली 
मिलजुलकर सब साथ रहो 
चाहे भले अलग हो बोली 
कोई हरा न पायेगा 
अगर बन जाओ एक टोली 

- नीतू ठाकुर 


गीतिका (मापनी -1222 1222 122)

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