गुरुवार, 27 सितंबर 2018

जुदा है जिंदगी अपनी.....नीतू ठाकुर


जुदा है जिंदगी अपनी
जुदा अपनी कहानी है
भुला देना की दुनिया में
तुम्हारी एक दीवानी है

ये बिखरे रंग जीवन के
समेटे फिर न जायेंगे
तुम्हें बेचैन कर देंगे
कभी जब याद आएंगे 

तेरी रंगीन है दुनिया 
मेरे दिल में वीरानी है 
मेरी बेनूर आँखों में 
तो बस ठहरा सा पानी है 

कोई शिकवा नही तुमसे 
नही कोई शिकायत है 
हमें चाहा कभी तुमने 
सनम तेरी इनायत है 

सजाले जिंदगी अपनी 
अभी बाकी जवानी है 
न जाने कितनी चाहत 
जिंदगी में आनी-जानी हैं 

मुबारक हों तुम्हें खुशियाँ 
तेरी दुनिया सुहानी है 
मुकद्दर में नही है हम 
भले चाहत पुरानी है 

- नीतू ठाकुर  



44 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! वाह ! क्या बात है ! बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति ! बहुत खूब आदरणीया ।

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    1. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया आप का इस प्रतिक्रिया के लिए। आशिर्वाद बनाये रखें।

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  2. यह बिखरे रंग जीवन के
    समेटे फिर न जाएंगे
    तुम्हें बैचेन कर देंगे
    कभी जब याद आएंगे
    वाह्ह्ह बहुत शानदार रचना नीतू जी

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    1. बहुत बहुत आभार
      आप की प्रतिक्रिया हमेशा ही हौसला बढाती है।

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. क्या बात है..नीतू जी..बहुत ही खूबसूरत..👌

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  5. वाह सखी बहुत सुन्दर रचना 🙏

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  6. वाह सखी लाजवाब!!
    बहुत ही सुंदर, सच कहूं तो साहिर साहब की याद दिला दी आपकी इस रचना ने धाराप्रवाहता लिये गेय रचना ।

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    1. क्या खूब समझा आपने ....मेरे मन का हर शब्द पढ़ लिया आप ने।
      आप ने सराहा लेखन सार्थक हुआ। आभार सखी।

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (28-09-2018) को "आओ पेड़ लगायें हम" (चर्चा अंक-3108) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    उत्तर
    1. आप को रचना पसंद आई लेखन सार्थक हुआ। ह्रदय से आभार।

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  8. नीतु दी, बहुत ही खुबसुरत रचना। मन की प्रेम भरी व्याकुलता व्यक्त करती रचना।

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  9. बेहद सुंदर...वाहहह.. वाहहह और सिर्फ वाह्ह्ह... गुनगुनाती रचना की बधाई आपको नीतू।

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    1. बहुत बहुत आभार सखी श्वेता जी।
      एकदम सही भाव पकड़ा आप ने। शानदार प्रतिक्रिया देती है आप।

      हटाएं
  10. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन धारा 377 के बाद धारा 497 की धार में बहता समाज : ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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    उत्तर
    1. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया आप का मेरी रचना को स्थान देने के लिए ।

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  11. बहुत बहुत सुंदर। बहुत ख़ूबसूरत रचना। wahhhhh

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  12. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक १ अक्टूबर २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  13. चाहतों के मेले है लेकिने उस एक चाहत सी छटपटाते रहते हैं.
    बहुत सुंदर रचना. रंगसाज़

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    1. बहुत बहुत आभार आपका इस खूबसूरत प्रतिक्रिया के लिए।

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  14. बहुत ही सुंदर रचना सखी ...बधाई

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  15. प्रेम और चाहत के खूबसूरत भावों से सजी शानदार कृति....
    कमाल की रचना...
    वाह!!!!
    बधाई आपको इस लाजवाब रचना के लिए...

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  16. विद्रोह या न पाने की विरसता!!!

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  17. दिल की जुबां मुहब्बत की कहानी कह रहे हैं ...
    बहुत खूब लिखा है ...

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  18. बहुत सुंदर रचना है, बधाई हो

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  20. वाह.. वाह... वाह .. बेहद खूबसूरत ख्याल ..

    जवाब देंहटाएं

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