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शुक्रवार, 12 अक्तूबर 2018

तुझे एक नजर देखा है .... नीतू ठाकुर


रेशमी जुल्फ में बिखरे सुनहरे ओस के मोती
हमें बेचैन ना करते अगर चाहत नही होती

तेरी खामोश नजरों ने बहुत कुछ कह दिया हमसे
तुम्हारी मुस्कुराहट ने निकाला है हमें गम से

तेरा ख़्वाबों में ख्यालों में बसर देखा है
जब से नजरों नें तुझे एक नजर देखा है

कोई तो बात है तुझमें कोई दानाई है
तेरी चाहत का जो यूँ खुद पर असर देखा है

न जाने क्यों तेरी हर बात पर हमको यकीं आये
मेरी वीरान दुनिया में वो बनकर रौशनी आये

बहुत गम सह चुके हैं हम बहुत आँसू बहाये हैं
मगर फिर भी ये दिल कहता न तुम बिन अब ख़ुशी आये

तुम्हीं से हर ख़ुशी मेरी तुम्हीं से हैं हमारे गम
मेरी हर एक दुआ तुम पर निछावर है मेरे हमदम

मेरी उलझन को सुलझाए मुझे वो बंदगी आये
जहाँ तुम साथ ना हो अब न ऐसी ज़िंदगी आये

                          - नीतू ठाकुर

गुरुवार, 27 सितंबर 2018

जुदा है जिंदगी अपनी.....नीतू ठाकुर


जुदा है जिंदगी अपनी
जुदा अपनी कहानी है
भुला देना की दुनिया में
तुम्हारी एक दीवानी है

ये बिखरे रंग जीवन के
समेटे फिर न जायेंगे
तुम्हें बेचैन कर देंगे
कभी जब याद आएंगे 

तेरी रंगीन है दुनिया 
मेरे दिल में वीरानी है 
मेरी बेनूर आँखों में 
तो बस ठहरा सा पानी है 

कोई शिकवा नही तुमसे 
नही कोई शिकायत है 
हमें चाहा कभी तुमने 
सनम तेरी इनायत है 

सजाले जिंदगी अपनी 
अभी बाकी जवानी है 
न जाने कितनी चाहत 
जिंदगी में आनी-जानी हैं 

मुबारक हों तुम्हें खुशियाँ 
तेरी दुनिया सुहानी है 
मुकद्दर में नही है हम 
भले चाहत पुरानी है 

- नीतू ठाकुर  



शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

मेघ मल्हार सुनाने आये ... नीतू ठाकुर


मेघ मल्हार सुनाने आये 
हिय की व्यथा दिखाने आये 
बरस रहे अंबर के आँसू 
धरती तक पहुँचाने आये 

जाने कब से धरा है प्यासी 
प्रतिपल छायी रहती उदासी 
बन उपहार विकल प्रेमी का 
प्रेम सुधा बरसाने आये 

मेघ मल्हार सुनाने आये  .... 

प्रेम अगाध मौन है भाषा 
कैसे व्यक्त करें अभिलाषा 
विरह वेदना विरही जाने 
विरहन को समझाने आये 

मेघ मल्हार सुनाने आये  .... 

जो इस जग की प्यास बुझाये 
उसकी तृष्णा कौन मिटाये 
तड़प रहा है वो भी तुम बिन 
यह संदेश बताने आये  

मेघ मल्हार सुनाने आये  .... 

              -नीतू ठाकुर 

बुधवार, 12 सितंबर 2018

बेखौफ लहरें .....नीतू ठाकुर


जरा तहज़ीब सिखलाये , कोई बेखौफ लहरों को 
जो अक्सर तोड आती हैं , कड़े सागर के पहरों को 

सुनाती हो भला क्यों यूँ , प्रलय का गीत बहरों को 
तुम्हारे खेल में मिटते हुए , देखा है शहरों को

मिटाकर क्या मिला तुमको , नही कुछ साथ ले जाती 
भयानक याद बनती हो ,जो बिछड़ों को नही भाती 

तेरी नादानियों से सूर्य  भी , बेनूर लगता है 
अंधेरी रात में चंदा , शर्म से चूर लगता है 

क्षितिज के पार देखो , चांदनी आंसू बहाती है 
तेरा साया जहाँ पड़ता , सिसकती भोर आती है 

ये टूटे आशियाँ आँखों में , बिखरे ख्वाब बाकी हैं 
दिए सौगात में आंसू , बता तू कैसा साकी है 

 - नीतू ठाकुर 

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी.....नीतू ठाकुर


हे मितवा मनमीत मेरे
हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी
शब्दों में जो बंध ना पाये
ऐसे कुछ अरमान लिखूंगी

प्रीत के पथ के हम दो राही 
तेरा नेह बनाकर स्याही 
अपने अनुरागी जीवन में 
तुझको अपनी जान लिखूंगी 

खुद को खोकर तुझको पाया
ईश मेरे मै तेरी छाया
अपना सबकुछ अर्पण करके
तुझको ही पहचान लिखूंगी

जन्मों जनम तुम्हीं को चाहूँ 
तुमको पाकर सब बिसराऊँ 
रंग जाऊँगी रंग में तेरे 
मै खुद को अनजान लिखूंगी 

तुझसे है श्रृंगार हमारा 
मै आश्रित तू मेरा सहारा 
एक दूजे के पूरक बनकर 
तुझको अपना मान लिखूंगी 

- नीतू ठाकुर 



शुक्रवार, 24 अगस्त 2018

जाने क्यों तेरी याद.....नीतू ठाकुर

जाने क्यों तेरी याद तेरे बाद भी रही 
हर शाम तेरे नाम तेरे बाद भी रही 

नाकाम कोशिशें की भुलाने की आप को 
ये जान तेरे नाम तेरे बाद भी रही 

कब तक तलाशते हम ख्यालों में आप को 
चाहत ये बेजुबान तेरे बाद भी रही 

आँखों में अश्क़ भरकर रूखसत वो हो गए 
उम्मीद हसरतों को तेरे  बाद भी रही 

हमको पराया कर गए शब्दों के तीर से 
हर बात तेरी याद तेरे बाद भी रही  

आँखों में नमी दिल में बसती उदासियाँ 
सौगात तेरी साथ तेरे बाद भी रही 

 - नीतू ठाकुर 

गुरुवार, 9 अगस्त 2018

शहीद की माँ... नीतू ठाकुर


सरहद पे चली जब गोली
तब माँ धरती से बोली
मेरा लाल है तेरे हवाले
कहीं लग ना जाये गोली

रस्ता देख रहें हैं उसका
व्याकुल से दो नैना
पिछले बरस ही लाई थी
मै नई दुल्हन का गौना
सूनी ना होने देना
दुल्हन की मेरे कलाई
जीते जी मर जाऊँगी
अगर बेवा नजर वो आई

सरहद पे चली जब गोली  .....

नन्ही बिटिया खो ना दे
कहीं बाबुल का आधार
एक बार भी कर ना पाया
बेटा उसको प्यार
बिन बाबुल के पा न सकेगी
चाहत और दुलार
नन्ही सी उस जान पे
कर देना  इतना उपकार

सरहद पे चली जब गोली  .....

खून से लथपथ लाल मेरा 
जब सपनों में है आता 
सीना छलनी हो जाता है 
जब वो मुझे बुलाता 
होती रहती है अब घर में 
अश्कों की बरसात 
नींद नही आती अब हमको 
सारी सारी रात 

सरहद पे चली जब गोली  .... 

धरती का जवाब :-

वीर शहीदों की लाशों पर 
कितने नीर बहाऊँ 
कहाँ छुपाऊँ लालों को 
मै खुद ही समझ ना पाऊँ 
मेरी खातिर लड़ते है 
मुझपर ही चला कर गोली 
तुम सब मेरे लाल हो 
यूँ  ना खेलो खून की होली 
मिलजुलकर सब साथ रहो 
चाहे भले अलग हो बोली 
कोई हरा न पायेगा 
अगर बन जाओ एक टोली 

- नीतू ठाकुर 


तुझे एक नजर देखा है .... नीतू ठाकुर

रेशमी जुल्फ में बिखरे सुनहरे ओस के मोती हमें बेचैन ना करते अगर चाहत नही होती तेरी खामोश नजरों ने बहुत कुछ कह दिया हमसे तुम्हारी...