शुक्रवार, 27 अगस्त 2021

विदुषी व्यंजना गीत नवगीत संग्रह


मेरा प्रथम एकल संग्रह



सादर नमन 🙏

आज मुझे मेरा प्रथम एकल संग्रह "विदुषी व्यंजना" प्राप्त हुआ, जिसे देख कर अपार हर्ष की अनुभूति हुई। इस खुशी की तुलना करना चाहूँ तो यह अनुभव बिल्कुल वैसा ही है जैसा अपने नवजात शिशु को पहली बार देखने पर हुआ था। शिशु के प्रथम स्पर्श ने जिस पूर्णता का आभास कराया था वही आभास आज इस संग्रह ने मेरे कवि मन को कराया है। पन्नों में बिखरे हुए मेरे गीत और नवगीत जब सज-संवरकर एक संग्रह के रूप में मेरे सामने आए तो   ऐसा लगा जैसे हर पंक्ति मेरी खुशी में शामिल होकर आभार व्यक्त कर रही है उन्हें एक स्थान और पहचान देने के लिए। अपनी ही रचनाओं को बार-बार पढ़ने का मन होने लगा।  


मैं गुरुदेव संजय कौशिक 'विज्ञात' जी का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूँ जिनकी प्रेरणा और प्रयास के बिना मैं इस संग्रह की कल्पना भी नही कर सकती थी। गीत नवगीत क्या है यह गुरुदेव से ही जाना और इस संग्रह की प्रथम रचना से लेकर अंतिम रचना तक गुरुदेव का स्नेहाशीष समाया हुआ है। यह संग्रह मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नही है जिसे मैंने गुरुदेव और अपने माता पिता को समर्पित किया है। मेरे पूरे परिवार के लिए यह खुशी का मौका है। मेरी माँ, मेरा भाई, बच्चे और पतिदेव सभी को गर्व की अनुभूति हुई। इस संग्रह में अविस्मरणीय योगदान विज्ञात नवगीत माला मंच का भी रहा है जहाँ सभी साथियों के साथ लिखते-लिखते मैं इतनी रचनाएँ लिख पाई की उसका संग्रह बन सके ....सभी का लेखन इतना आकर्षक है कि लिखने की प्रेरणा तो देता ही है साथ ही नए बिम्बों को कैसे खोजा जाए यह भी सिखाता है। 

गुरुदेव के अलावा परम आदरणीय रमेशचन्द्र कौशिक 'गुरुजी', बाबूलाल शर्मा बौहरा 'विज्ञ' जी , अचला शर्मा जी, मेरी माँ सचिता सिंह जी का विशेष आभार मेरे संग्रह का अभिन्न हिस्सा बनने के लिए। मैं विज्ञात प्रकाशन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती हूँ कि उन्होंने मेरे संग्रह को इतना सुंदर रूप दिया। लिखने को बहुत कुछ है पर फिलहाल इतना ही ....

आप सभी का स्नेहाशीष यूँ ही मिलता रहे यही ईश्वर से प्रार्थना। इस संग्रह को पढियेगा जरूर 🙏

नीतू ठाकुर 'विदुषी'




सौगंध पुरानी ...नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 नवगीत सौगंध पुरानी मापनी 12/12 इक नौका इतराती झूमी दीवानी सी हर रेत हुई खारी अर्णव के पानी सी तट मौन खड़े दर्शक वृक्षों की संगत में केसरिया ...