एहसास कभी शब्दों का मोहताज नहीं होता
ये दुनिया कायम नहीं होती अगर एहसास नहीं होता
एहसास बना एक गूढ़ प्रश्न कितना उसको सुलझाएं
हर पल होता मौजूद मगर वो कभी नजर न आये
एहसासों का भंवर जाल ऐसे मन को उलझाए
हम लाख निकलना चाहें पर हम कभी निकल न पाएं
एहसास नही बंधता न भाषा न धर्म से
बनते बिगड़ते रिश्ते अपने अपने कर्म से
एहसास बयां कर पाएं वो शब्द कहाँ से लाऊँ
काश मौन अंतर मन को मै कभी जुबाँ दे पाऊँ
- नीतू ठाकुर
