गुरुवार, 27 सितंबर 2018

जुदा है जिंदगी अपनी.....नीतू ठाकुर


जुदा है जिंदगी अपनी
जुदा अपनी कहानी है
भुला देना की दुनिया में
तुम्हारी एक दीवानी है

ये बिखरे रंग जीवन के
समेटे फिर न जायेंगे
तुम्हें बेचैन कर देंगे
कभी जब याद आएंगे 

तेरी रंगीन है दुनिया 
मेरे दिल में वीरानी है 
मेरी बेनूर आँखों में 
तो बस ठहरा सा पानी है 

कोई शिकवा नही तुमसे 
नही कोई शिकायत है 
हमें चाहा कभी तुमने 
सनम तेरी इनायत है 

सजाले जिंदगी अपनी 
अभी बाकी जवानी है 
न जाने कितनी चाहत 
जिंदगी में आनी-जानी हैं 

मुबारक हों तुम्हें खुशियाँ 
तेरी दुनिया सुहानी है 
मुकद्दर में नही है हम 
भले चाहत पुरानी है 

- नीतू ठाकुर  



शुक्रवार, 21 सितंबर 2018

मेघ मल्हार सुनाने आये ... नीतू ठाकुर


मेघ मल्हार सुनाने आये 
हिय की व्यथा दिखाने आये 
बरस रहे अंबर के आँसू 
धरती तक पहुँचाने आये 

जाने कब से धरा है प्यासी 
प्रतिपल छायी रहती उदासी 
बन उपहार विकल प्रेमी का 
प्रेम सुधा बरसाने आये 

मेघ मल्हार सुनाने आये  .... 

प्रेम अगाध मौन है भाषा 
कैसे व्यक्त करें अभिलाषा 
विरह वेदना विरही जाने 
विरहन को समझाने आये 

मेघ मल्हार सुनाने आये  .... 

जो इस जग की प्यास बुझाये 
उसकी तृष्णा कौन मिटाये 
तड़प रहा है वो भी तुम बिन 
यह संदेश बताने आये  

मेघ मल्हार सुनाने आये  .... 

              -नीतू ठाकुर 

बुधवार, 12 सितंबर 2018

बेखौफ लहरें .....नीतू ठाकुर


जरा तहज़ीब सिखलाये , कोई बेखौफ लहरों को 
जो अक्सर तोड आती हैं , कड़े सागर के पहरों को 

सुनाती हो भला क्यों यूँ , प्रलय का गीत बहरों को 
तुम्हारे खेल में मिटते हुए , देखा है शहरों को

मिटाकर क्या मिला तुमको , नही कुछ साथ ले जाती 
भयानक याद बनती हो ,जो बिछड़ों को नही भाती 

तेरी नादानियों से सूर्य  भी , बेनूर लगता है 
अंधेरी रात में चंदा , शर्म से चूर लगता है 

क्षितिज के पार देखो , चांदनी आंसू बहाती है 
तेरा साया जहाँ पड़ता , सिसकती भोर आती है 

ये टूटे आशियाँ आँखों में , बिखरे ख्वाब बाकी हैं 
दिए सौगात में आंसू , बता तू कैसा साकी है 

 - नीतू ठाकुर 

गुरुवार, 6 सितंबर 2018

हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी.....नीतू ठाकुर


हे मितवा मनमीत मेरे
हर गीत तुम्हारे नाम लिखूंगी
शब्दों में जो बंध ना पाये
ऐसे कुछ अरमान लिखूंगी

प्रीत के पथ के हम दो राही 
तेरा नेह बनाकर स्याही 
अपने अनुरागी जीवन में 
तुझको अपनी जान लिखूंगी 

खुद को खोकर तुझको पाया
ईश मेरे मै तेरी छाया
अपना सबकुछ अर्पण करके
तुझको ही पहचान लिखूंगी

जन्मों जनम तुम्हीं को चाहूँ 
तुमको पाकर सब बिसराऊँ 
रंग जाऊँगी रंग में तेरे 
मै खुद को अनजान लिखूंगी 

तुझसे है श्रृंगार हमारा 
मै आश्रित तू मेरा सहारा 
एक दूजे के पूरक बनकर 
तुझको अपना मान लिखूंगी 

- नीतू ठाकुर 



सौगंध पुरानी ...नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 नवगीत सौगंध पुरानी मापनी 12/12 इक नौका इतराती झूमी दीवानी सी हर रेत हुई खारी अर्णव के पानी सी तट मौन खड़े दर्शक वृक्षों की संगत में केसरिया ...