गुरुवार, 26 जुलाई 2018

किस्मत के फैसले.... नीतू ठाकुर


न जाने किसके हाथ हैं किस्मत के फैसले 
बढ़ती ही जा रहीं हैं राहों की मुश्किलें 
सजदा करें तो किसके दर पर करें बता ?
कब तक रहेंगे कायम इस दिल के हौसले ?

नेकी और शराफत भी बेकार हो गए 
मेहनत के पसीने भी बेजार हो गए 
काटों भरी हैं राहें मंजिल भी लापता 
तकदीर लिखनेवाले अपना पता बता ?

किस जुर्म की सजाएँ सहते रहें हैं हम 
जो हमसफ़र बनें हैं इस जिंदगी के गम 
कोई तो रास्ता हो कोई तो हो दयार 
कब तक करेगी जिंदगी खुशियों का इंतजार ?

दिखते नही क्या जुल्म ? सुनता नही क्या आहें ?
किससे करें फरियाद गम में किसे बुलाएँ ?
इतनी भी देर ना कर की उम्र गुजर जाये 
जब सामने हों खुशियाँ तब हम न नजर आएं 

                 - नीतू ठाकुर 

30 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी भी देर ना कर की उम्र गूजर जाऐ
    जब सामने हो खुशियाँ तब हम न नजर आयें. ..

    वाह अतिसुन्दर अतुलनीय सखी बहुत सुन्दर कहा आपने तकदीर का फसाना।

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    1. बहुत बहुत आभार सखी कुसुम
      आप की प्रतिक्रिया हौसला बढ़ा गई

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  2. बहुत दिनों बाद आपकी रचना पढी..बहुत सुंदर संवेदनशील रचना।

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का इस प्रतिक्रिया के लिए। आशिर्वाद बनाये रखें।

      हटाएं
  3. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (27-07-2018) को "कौन सुखी परिवार" (चर्चा अंक-3045) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
    ---------------

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    उत्तर
    1. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया आप का मेरी रचना को स्थान देने के लिए । आशिर्वाद बनाये रखें।

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  4. कब तक करेगी जिंदगी खुशियों का इंतजार वाह बेहतरीन रचना 👌👌

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    1. बहुत बहुत आभार
      बहुत अच्छी प्रतिक्रिया .... स्नेह बनाये रखें।

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  5. तकदीर लिखनेवाले अपना पता बता...

    बहुत ही सुंदर लिखा है आपने।।।।

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का इस प्रतिक्रिया के लिए।

      हटाएं
  6. ये क़िस्मत के फ़ैसले अपने हाथ में ही होते हैं और कई बार कर्मों अनुसार तय होते हैं ..।
    बहुत सादगी से लिखा है आपने क़िस्मत के इन खेलों को ...
    सुंदर रचना है ...

    जवाब देंहटाएं
  7. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया आप का इस प्रतिक्रिया के लिए। आशिर्वाद बनाये रखें।

    जवाब देंहटाएं
  8. नीतू जी , इतना दर्द ,इतनी गहराई क्‍ैसे उपजी, नहीं पता लेकिन दिल को छू लेने वाली और देर तक ज़हन पर छाने वाली रचना है।

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    1. बहुत बहुत आभार
      यूँ ही आशीष बनाये रखें।

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  9. वाह वाह बहुत खूब नीतू जी ..
    तकदीर लिखने वाले तेरा पता बता ....बहुत खूब ....
    आज मुरारी फंसे जाल में
    क्या उत्तर दे पाते
    कैसे बताते हम तो यारों
    भक्तों के दिल में रहते !
    डर के मारे चुप्पी साधे
    टुकुर टुकुर देखें जाये
    कर्मों का फल लेना पड़ता
    स्वयं नरायण भी दुख पाये !

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    1. बहुत बहुत आभार
      आप की प्रतिक्रिया हमेशा ही हौसला बढाती है।

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  10. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विजय दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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    उत्तर
    1. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया आप का मेरी रचना को स्थान देने के लिए । आशिर्वाद बनाये रखें।

      हटाएं
  11. हृदयस्पर्शी सुन्दर रचना नीतू जी

    जवाब देंहटाएं
  12. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक ३० जुलाई २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत शुक्रिया आप का मेरी रचना को स्थान देने के लिए ।

      हटाएं

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