रविवार, 31 जनवरी 2021

स्ट्रोबेरी मन की बात

यह रचना सरकार के विरुद्ध नही है पर अन्नदाता से गद्दारी नही कर सकते....

आज स्ट्रॉबेरी उगाओ
ये नई तकनीक आई
आय दुगनी हो सकेगी
बात सेवक ने बताई

दो गुनी क्या चीज है फिर
दस गुनी का ज्ञान भी है
रोपनी है कृषि अफीमी 
सौ गुनी का ध्यान भी है
जिद्द पर सरकार बैठी
हो सके यूँ सब भलाई

आज की बेरोजगारी
देश में खुशियाँ मनाती
ये चतुर सरकार देखो
एक मुद्दे पर न आती
चूमती नभ दर विकासी
भाषणों में नित बताई

बोलती सरकार है जब
आज अच्छे दिन तुम्हारे
मानते जो हैं नही ये
देशद्रोही वो हमारे
रीत सत्ता जो चलाती
बात उसने ये सिखाई

धान बाली रो रही है
देख कर अपनी गरीबी
व्यर्थ सारे श्रम हुए हैं
स्ट्रॉबेरी लगती करीबी
रोटियां रूठी हुई हैं
खीर सत्ता ने बनाई

स्वप्न सुंदर बेचते हैं
गोलियाँ मीठी खिलाकर
शेखचिल्ली भी लजाता
इक स्वयं का शिष्य पाकर
शर्म से भारत झुका है
किरकिरी देती दिखाई

चाहतें सरकार की हैं
तुगलकी फरमान जैसे
माननी सबको पड़ेंगी
हो सके ये सत्य कैसे
दूत यम के बन खड़े हैं
इक ध्वजा उसको थमाई

आज आंदोलन मिटाना
चाहती सरकार अपनी
एकता को तोड़ कर यूँ
अब दिखाती धार अपनी
बात समझें नाक की क्यों
सच न देता क्यों सुनाई

नीतू ठाकुर 'विदुषी'

शनिवार, 30 जनवरी 2021

श्रेष्ठ ये सरकार...नीतू ठाकुर 'विदुषी'

बन अराजक तत्व घेरे

ये कृषक दिल्ली हमारी

कष्ट उल्का पिंड बरसा

दोष में सरकार सारी


आज आतंकी दिखे क्यों

शांति के जो हैं उपासक

फिर स्वयं झंडा लगाकर

चाहता क्या आज शासक

रात दिन षड्यंत्र रचती

आज की सरकार न्यारी


रोग कोरोना रुलाये

अश्रु से सूखा नही था

तब किसानी धौर्य चमका

देश जो भूखा नही था

आज अपने इस कृषक की

त्रासदी किसने निहारी


ऋण भला क्यों माँगती है

श्रेष्ठ ये सरकार ऐसे

ये कृषक बिन ऋण सबल जब

बेचते क्यों रेल जैसे 

छोड दे लालच अगर ये

ढाल अपनी सोच प्यारी


नीतू ठाकुर 'विदुषी'

सौगंध पुरानी ...नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 नवगीत सौगंध पुरानी मापनी 12/12 इक नौका इतराती झूमी दीवानी सी हर रेत हुई खारी अर्णव के पानी सी तट मौन खड़े दर्शक वृक्षों की संगत में केसरिया ...