पातियाँ संदूक से लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पातियाँ संदूक से लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 17 मार्च 2021

पातियाँ संदूक से ...नवगीत


 


पातियाँ संदूक से
मापनी ~ 14/12

यूँ विरह का गान करती
पातियाँ संदूक से
तिलमिलाई है घटा भी 
कोकिला की हूक से।।

कंकड़ों के चीखने से
कब हॄदय पथ का जला
लाँघती है पीर सीमा
घाव अंतस में पला
भाग्य पल में है बदलता
कंडियों में चूक से।।

रेत तपती जा रही है
बूँद बिन ज्यों भूख से
माँगते है प्राण आश्रय
सब झुके हैं रूख से
घास के तृण पीर सहते
सुन रहे हैं मूक से।।

रो रही हैं सब शिलाएँ
जो समाधी पर सजी
फूल भी मुरझा गए सब
जब चटक चूड़ी बजी
दे रही उत्तर व्यथा के
आज फिर दो टूक से।।

नीतू ठाकुर 'विदुषी'

पहलगाम का किस्सा पूछो : नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 पहलगाम का किस्सा पूछो  मेंहदी लगी हथेली से । प्रिय के शव पर अश्रु बहाती  नव परिणीता अकेली से ।। धर्म पूँछकर लज्जित करते  तन पर निर्मम वार क...