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गुरुवार, 26 जुलाई 2018

किस्मत के फैसले.... नीतू ठाकुर


न जाने किसके हाथ हैं किस्मत के फैसले 
बढ़ती ही जा रहीं हैं राहों की मुश्किलें 
सजदा करें तो किसके दर पर करें बता ?
कब तक रहेंगे कायम इस दिल के हौसले ?

नेकी और शराफत भी बेकार हो गए 
मेहनत के पसीने भी बेजार हो गए 
काटों भरी हैं राहें मंजिल भी लापता 
तकदीर लिखनेवाले अपना पता बता ?

किस जुर्म की सजाएँ सहते रहें हैं हम 
जो हमसफ़र बनें हैं इस जिंदगी के गम 
कोई तो रास्ता हो कोई तो हो दयार 
कब तक करेगी जिंदगी खुशियों का इंतजार ?

दिखते नही क्या जुल्म ? सुनता नही क्या आहें ?
किससे करें फरियाद गम में किसे बुलाएँ ?
इतनी भी देर ना कर की उम्र गुजर जाये 
जब सामने हों खुशियाँ तब हम न नजर आएं 

                 - नीतू ठाकुर 

शुक्रवार, 4 मई 2018

एक तुम्ही तो हो.....नीतू ठाकुर

रोज मै तुम्हें कितना 
इंतजार करवाता हूँ 
थक हारकर जब 
लौटकर आता हूँ 
ज़िंदगी की उलझनों में 
खोया खोया सा मै 
तुम्हारी प्यारी सी मुस्कान को 
नजरअंदाज कर जाता हूँ 
कभी कभी गुस्से में 
बहुत कुछ कह जाता हूँ 
और तुम्हारे जाने के बाद 
अधूरा सा रह जाता हूँ 
धधकती मन की ज्वाला से 
तुमको जलाता हूँ 
निर्दोष होते हुए भी 
कितना कुछ सुनाता हूँ 
क्यों की तुम ही तो हो जो 
समझ सकती हो मेरे जज्बात और 
हर पल कोसते परेशान करते मेरे ख़यालात 
एक तुम्ही तो हो 
जिसे अपना समझ कर 
सता सकता हूँ ,रुला सकता हूँ और 
प्यार के दो मीठे शब्दों से 
मना भी सकता हूँ 
जब पड़ जाती है रिश्ते में खटास 
तब भी दिल के किसी कोने में 
बच जाती है यादों की मिठास 
तुमसे मिलने के लिए 
दिल बेकरार रहता है 
इन आँखों को पल पल 
तुम्हारा इंतजार रहता है 
मै कुछ भी क्यो न करलूं पर 
तुम लौटकर आओगी 
ये ऐतबार रहता है 
तुम्हारे और मेरे दरमियाँ 
कायम हमेशा प्यार रहता है 
एक तुम ही तो हो जो 
इस पागल को अपना सकती हो 
मेरी हर खता भुलाकर 
मेरी खुशियों के लिए मुस्कुरा सकती हो 
तुम और सिर्फ तुम  ... 

             - नीतू ठाकुर 


पहलगाम का किस्सा पूछो : नीतू ठाकुर 'विदुषी'

 पहलगाम का किस्सा पूछो  मेंहदी लगी हथेली से । प्रिय के शव पर अश्रु बहाती  नव परिणीता अकेली से ।। धर्म पूँछकर लज्जित करते  तन पर निर्मम वार क...