google-site-verification: google596994c475cff8d2.html MAN SE- Nitu Thakur : मनमीत मै तेरा गीत बनूँ ....नीतू ठाकुर

सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

मनमीत मै तेरा गीत बनूँ ....नीतू ठाकुर

मनमीत मै तेरा गीत बनूँ 
संगीत बने एहसास 
है मन में बस इतनी सी आस 
रहूँ मै हर पल तेरे पास 

दो नैनों की डोली में 
मै कितने ख्वाब सजा बैठी 
तेरे प्रीत में ऐसे रंगी 
सारे रंग भुला बैठी 
जब तक तन में साँस है बाकी 
तब तक है विश्वास 
                                                                             रहूँ मै हर पल तेरे पास  ..... 

अब न कोई राँझा है और 
ना है हीर दिवानी 
बरसों पहले ख़त्म हुई हैं 
प्रेम की अमर कहानी 
अपने अनुरागी मन का 
दुनिया न करे उपहास 
                                                                          रहूँ मै हर पल तेरे पास  ..... 

जनम जनम के बंधन में 
जब बंध बैठे दो मीत 
कभी न टूटे फिर वो नाता  
है ये जग की रीत 
किस्मत ने जोड़ा ये रिश्ता 
है हमको आभास 
                                                                            रहूँ मै हर पल तेरे पास  ...... 

विरह वेदना सह न सकेंगे 
एक पल भी खुश रह न सकेंगे 
तुम खुशियों की चाभी हो ये 
तुम से कभी हम कह न सकेंगे 
हर पल नैना तुझको ढूँढे 
तुम बिन रहें उदास 
                                                                               रहूँ मै हर पल तेरे पास  ..... 
             - नीतू ठाकुर 



20 टिप्‍पणियां:

  1. अपने अनुरागी मन का दुनिया न करे उपहास... लाजवाब पंक्तियाँ. वाह 👏

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया
      बहुत बहुत आभार

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  2. खूबसूरती से अनुरागी मन की रचनाओं में ढाला है ..
    बहुत सुंदर।

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया....बहुत बहुत आभार

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  3. प्रियतम के अप्रितम अनुराग में डूबी प्रेयसी का आत्म्त्यता से भरी कामना को बहुत ही सुंदर शब्द दिए आपने प्रिय नीतू जी |प्रेम की सभी स्थितियां पार कर खोने का डर प्रेम को और भी प्रगाढ़ कर देता है | बहुत ही प्यारा प्रेम गीत !!!!!!!! सस्नेह -----

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया
      बहुत बहुत आभार

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  4. कृपया प्रेयसी की आत्मीयता पढ़े -- गलती के लिए खेद है |

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  5. बहुत ही प्यार से भरी प्यारी रचना

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया... बहुत बहुत आभार

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  6. विलक्षण प्रेम संगीत, या अनुरागी चित की गति, सब कुछ समर्पित
    कितनी विहलता सब कुछ बस केन्द्रित एक ही धुरी पर,
    सुंदरतम रचना नजाकत से भरी मद्धरिम पूर्वईया सी सम्मोहित करती सी।
    सखी बधाई इस रस संगीत की।

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया
      बहुत बहुत आभार

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (28-02-2018) को ) "होली के ये रंग" (चर्चा अंक-2895) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

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  8. बड़ी सुंदर रचना है नीतू जी

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  9. मन के कोमल प्रेम भाव ...
    जनम जनम के बंधन यूँ ही बने रहें ...

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया
      बहुत बहुत आभार

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  10. बेहतरीन रचना, मन को छूकर निकलती हुई, हर पल नैना ढूंढे तुझको तुम बिन रहे उदास.. मैं हर पल तेरे पास...👌👌

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    1. सुंदर प्रतिक्रिया
      बहुत बहुत आभार

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