google-site-verification: google596994c475cff8d2.html MAN SE- Nitu Thakur : पंख कटे पैरों में बेड़ी..... - नीतू ठाकुर

गुरुवार, 12 जुलाई 2018

पंख कटे पैरों में बेड़ी..... - नीतू ठाकुर


पंख कटे पैरों में बेड़ी
गुजरी उम्र बची बस थोड़ी
मिट्टी से जन्में पुतलों को
मिट्टी में मिल जाना है

एक बार बस एक बार
उस अंबर को छू आना है 

रीत, रिवाज, समाज के डर से 
खुद को मुक्त कराना है 
लाचारी की छोड़ दुशाला 
दुनिया से टकराना है 

एक बार बस एक बार 
उस अम्बर को छू आना है 

तुच्छ ,हीन ,अज्ञानी बनकर 
शून्य नही रह जाना है 
अर्थहीन जीवन को अपने 
अर्थवान कर जाना है 

एक बार बस एक बार 
उस अंबर छू आना है 

इस दुनिया के नक़्शे पर 
अपनी पहचान बनाना है 
जीवन एक संकल्प बनाकर 
जन्म सफल कर जाना है 

एक बार बस एक बार 
उस अंबर को छू आना है 

          - नीतू ठाकुर 

चित्र साभार - गूगल 

18 टिप्‍पणियां:

  1. अंबर को छू आना यही बात हमें जीवन
    में कितना कुछ करने के लिए प्रेरित करती
    है। बेहतरीन रचना 🙏

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    1. बहुत बहुत आभार सखी
      बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया दी आप ने रचना के मर्म को समझा ।

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  2. वाह!!नीतू जी ,बहुत ही उम्दा रचना !!
    एक बार बस एक बार उस अंबर को छू जाना है ..
    वाह!!लाजवाब !!

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार शुभा जी।
      आप की प्रतिक्रिया हमेशा ही हौसला बढाती है।

      हटाएं
  3. वाह सखी वाह सचमुच मन खुश हो गया, बहुत सुंदर संकल्प,
    अब तोड के बेडी उजडना है बस उजडना है
    नीला अम्बर दूर सही बस एक बार तो छूना है ।
    अप्रतिम अतुलनीय।

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    1. शानदार प्रतिक्रिया देती है आप।
      प्रिय सखी कुसुम जी ह्रदय से आभार।

      हटाएं
  4. वाह बहुत बढ़िया रचना
    एक बार बस एक बार
    उस अंबर को छू आना

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार सखी
      बहुत अच्छी प्रतिक्रिया .... स्नेह बनाये रखें।

      हटाएं
  5. बहुत सुन्दर रचना नीतू जी

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  6. उत्तर
    1. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया ।

      हटाएं
  7. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक १६ जुलाई २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

    उत्तर देंहटाएं
  8. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.com/2018/07/78.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  9. ये सच है की चंद सांसें ही हैं और फिर अनंत की यात्रा वी भी है या नहि किसने देखा ...
    वक बार तो मन की उन्मुक्त उड़ान पूरी करनी चाहिए अपनी पहचान बनानी चाहिए ...
    लाजवाब रचना ...

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    उत्तर
    1. आदरणीय बहुत बहुत शुक्रिया आप का इस प्रतिक्रिया के लिए।

      हटाएं

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