सोमवार, 2 मार्च 2020

बेबसी का दर्द ... नीतू ठाकुर 'विदुषी'

नवगीत
बेबसी का दर्द
नीतू ठाकुर 'विदुषी'

मापनी~ 16/14


चिड़िया आग दहकती में क्यों
आज स्वयं को झोंक रही।
लड़ती रहती छुरियों से जो
जब गर्दन पर नोंक रही
1
देख रहे सब मौन तमाशा,
ध्यान किसे है गैरों का।
जहां गुजारा पूरा जीवन,
शहर लगे वो औरों का।

पालक पालें लहू पिलाकर,
संताने बन जोंक रही।
चिड़िया आग दहकती में क्यों,
आज स्वयं को झोंक रही।

2
वृक्ष हमें बस छाया बांटे,
कर्म सिखाते उपकारी।
आज हरी सी शाखाओं में,
चिड़िया स्वाहा तैयारी।

दीमक चाट रही जिस तन को
छलनी करती चोंक रही।
चिड़िया आग दहकती में क्यों,
आज स्वयं को झोंक रही।

3
कल्पवृक्ष जब जलते देखे,
अंदर तक वह काँप उठी।
बचा नहीं है कुछ भी बाकी,
हालत अपनी भाँप उठी।

मन्नत चुनरी राख बनी सब,
शेष अभी तक टोंक रही।
चिड़िया आग दहकती में क्यों,
आज स्वयं को झोंक रही।

नीतू ठाकुर 'विदुषी'

16 टिप्‍पणियां:

  1. पाखी के घर घरौंदे वृक्ष के साथ जल जाने के पश्चात उसके अंतः करण की पीर का उत्तम अवलोकन , श्रेष्ठ भावाभिव्यक्ति अद्भुत शिल्प, लय और शब्द चयन जो रचना के आकर्षण का विषय हैं 😍
    👌👌👌बधाई 💐💐💐

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय आपको रचना पसंद आई लेखन सार्थक हुआ 🙏🙏🙏

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  2. निम्न दो लिंकों पर एक सी ही पोस्ट है और दोनों ने अपने-अपने नाम से पोस्ट की हैं। पता नहीं कि इस पोस्ट का वास्तविक रचयिता कौऩ है? नीतू ठाकुर या संजय कौशिक विज्ञात?
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (04-03-2020) को    "रंगारंग होली उत्सव 2020"  (चर्चा अंक-3630)    पर भी होगी। 
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय मेरी रचना को स्थान देने के लिए 🙏🙏🙏 शायद गलती से जल्दबाजी में आपने विज्ञात सर के नाम से गलत रचना प्रेषित कर दी है 🙏

      नवगीत
      लाचारी
      संजय कौशिक 'विज्ञात'

      मापनी~16/14


      चिड़िया आग दहकती में क्यों
      आज स्वयं को झोंक रही।
      जलते दिखते वृक्ष घौंसले,
      कितनी कुतिया भौंक रही।

      उनकी रचना यह है 🙏🙏🙏 कृपया नीचे दिए गए लिंक को उनकी रचना के साथ जोड़ें 🙏🙏🙏 सर द्वारा दी गई पंक्ति पर हमने सृजन किया है पंक्ति उन्ही की है ...वो विज्ञात नवगीत माला में नवगीत लिखना सिखाते है 🙏🙏🙏
      http://vigyatkikalam55.blogspot.com/2020/03/blog-post_72.html

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    2. जी अब सुधघार कर दिया है।
      विज्ञात जी से बात हो गयी और सन्देश समाप्त हो गया।

      हटाएं
  3. जिस तन बीती वो ही जाने ..बहुत खूबसूरती से उकेरा है आपने दर्द को👌👌👌👌👌
    पालक पालें लहू पिलाकर संतानें बन जोंक रही..वर्तमान परिस्थितियों का यथार्थ चित्रण बहुत बहुत बधाई 💐💐💐💐

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  4. बहुत ही सुंदर सृजन सखी
    सादर

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  5. लाजवाब नवगीत
    बहुत सुन्दर हृदयस्पर्शी
    वाह!!!

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  6. निःशब्द करती रचना👏👏👏👏👌👌👌👌👌

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