शनिवार, 24 मार्च 2018

एहसास कभी शब्दों का मोहताज नहीं होता ....नीतू ठाकुर


एहसास कभी शब्दों का मोहताज नहीं होता 
ये दुनिया कायम नहीं होती अगर एहसास नहीं होता 

एहसास बना एक गूढ़ प्रश्न कितना उसको सुलझाएं 
हर पल होता मौजूद मगर वो कभी नजर न आये 

एहसासों का भंवर जाल ऐसे मन को उलझाए 
हम  लाख निकलना चाहें पर हम कभी निकल न पाएं  

एहसास नही बंधता न भाषा न धर्म से 
बनते बिगड़ते रिश्ते अपने अपने कर्म से 

एहसास बयां कर पाएं वो शब्द कहाँ से लाऊँ    
काश  मौन अंतर मन को मै कभी जुबाँ दे पाऊँ   

                  - नीतू  ठाकुर






22 टिप्‍पणियां:

  1. वाह!!नीतू जी ,बहुत खूबसूरत लिखा आपने ..।।

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  2. प्रिय नीतू जी -- बहुत सुंदर बात लिखी आपने भावनाओं की कोई जुबान , धर्म या मूर्त नहीं होती | इन्हें शब्दों में व्यक्त करना नामुमकिन है | मनभावन रचना -- सस्नेह --------|

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    1. बहुत बहुत आभार
      आप की प्रतिक्रिया देखकर मन प्रसन्नता से भर गया

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  3. एहसास बयां कर पाए वो शब्द कहाँ से लाऊँ
    काश मौन अंतर्मन को मैं कभी जुबाँ दे पाऊँ.... अत्युत्तम
    बेहतरीन भाव. वाह नीतू जी. 👏 👏 👏

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    1. बहुत बहुत आभार
      आप की प्रतिक्रिया और अच्छा लिखने की प्रेरणा देती है

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  4. प्रिय नीतू जी,कितना सच लिखा है आपने ... भावनाओं को शब्द देकर भी इनका पूरा चित्रण करना बहुत मुश्किल है । बहुत सुन्दर रचना ।
    सादर ।

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    1. बहुत बहुत आभार
      बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया

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  5. एहसास भी एक बहती जलधार है
    एहसास पर एहसास से सजी सुंदर रचना
    धारा प्रवाह लिये ।

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    1. बहुत बहुत आभार सखी।
      कविता का मर्म बहुत अच्छे से समझती है आप।

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  6. बहुत खूबसूरती से एहसासों की गुत्थी सुलझाने की कोशिश!बेहतरीन रचना।

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    1. बहुत बहुत आभार
      कविता का मर्म बहुत अच्छे से समझती है आप।
      बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया

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  7. उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार
      बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया

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